पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला में आधुनिक तकनीक का संगम, लेजर तकनीक से जीवंत हुई रामलीला

देहरादून। रेसकोर्स स्थित श्री गुरु नानक मैदान में श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून की ओर से आयोजित उत्तराखंड की ऐतिहासिक भव्य रामलीला महोत्सव–2026 के सातवें दिवस को ‘गंगा-जमुना दिवस’ के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर भगवान श्रीराम और हनुमान के मिलाप, बाली वध तथा मेघनाद और हनुमान के बीच युद्ध संवाद के रोमांचक प्रसंगों का मंचन किया गया। आधुनिक लेजर तकनीक से हनुमान को नागपाश में बांधने और डिजिटल तकनीक के माध्यम से लंका दहन के भव्य दृश्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

डिजिटल स्क्रीन, लेजर प्रभाव और अत्याधुनिक ध्वनि तकनीक के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में टिहरी के विधायक किशोर उपाध्याय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

रामलीला के मंच से पर्यावरण संरक्षण का संदेश

‘गंगा-जमुना दिवस’ के माध्यम से समिति ने गंगा, यमुना, हिमालय और प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण का संदेश दिया। वक्ताओं ने कहा कि गंगा और यमुना केवल नदियां नहीं, बल्कि देश की सभ्यता, संस्कृति, आस्था और करोड़ों लोगों के जीवन का आधार हैं। हिमालयी ग्लेशियरों का पिघलना, जलवायु परिवर्तन और नदियों में बढ़ता प्रदूषण गंभीर चिंता के विषय हैं। भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने के लिए हिमालय, ग्लेशियरों तथा नदी स्रोतों का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्य अतिथि किशोर उपाध्याय ने कहा कि पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करना एक बड़ा भगीरथ प्रयास है। टिहरी के जलमग्न होने के बाद इस परंपरा को देहरादून में आगे बढ़ाने के लिए समिति और अध्यक्ष अभिनव थापर का प्रयास सराहनीय है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक रामलीला में आधुनिक लेजर और डिजिटल तकनीक का समावेश दर्शकों को आकर्षित करने के साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है।

उपाध्याय ने कहा कि गंगा, यमुना और हिमालय का संरक्षण उत्तराखंड के भविष्य तथा पर्यावरणीय संतुलन से जुड़ा विषय है। ‘हिमालय बचाओ’ की भावना को जनआंदोलन बनाने और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

गढ़वाली फिल्म ‘घस्यारी’ के ट्रेलर का लोकार्पण

कार्यक्रम के दौरान मां शक्ति पिक्चर प्रोडक्शंस और फिल्म निर्देशक सुनील बडौनी की ओर से निर्मित गढ़वाली फिल्म ‘घस्यारी’ का ट्रेलर भी लॉन्च किया गया। फिल्म की कहानी के माध्यम से गंगा-जमुना, प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संदेश को सामने लाने का प्रयास किया गया है।

समिति ने उत्तराखंड की लोककला, लोकसंस्कृति और क्षेत्रीय सिनेमा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रामलीला के मंच पर फिल्म के ट्रेलर को स्थान दिया। समिति का मानना है कि ऐसे बड़े सांस्कृतिक आयोजन उत्तराखंड की लोकभाषा और गढ़वाली सिनेमा को पहचान दिलाने के साथ सामाजिक सरोकारों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला वर्ष 1952 से सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रही है। टिहरी बांध के कारण पुरानी टिहरी के जलमग्न होने के बाद इस परंपरा को देहरादून में पुनर्जीवित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को भव्य रूप में प्रस्तुत करने के साथ पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सरोकारों और उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को बढ़ावा देना भी है।

कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित

कार्यक्रम में राज्य मंत्री नितिन गौतम, परवादून कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल, फिल्म निर्देशक सुनील बडौनी, मां शक्ति पिक्चर प्रोडक्शंस के संस्थापक परिणीत बडौनी, गढ़वाली फिल्म कलाकार रमेश रावत, दिनेश बौड़ाई और भारती आनंद, डॉ. विनय कोहली, प्रदेश अध्यक्ष महिला कांग्रेस ज्योतिरादित्य राव सिंधिया, कांग्रेस नेता पीया थापा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राकेश भट्ट और भारती आनंद ने किया।

डिजिटल माध्यमों पर भी लोकप्रिय रामलीला

समिति के अनुसार, पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला को टिहरी बांध के कारण पुरानी टिहरी के जलमग्न होने के बाद देहरादून में पुनर्जीवित किया गया। वर्ष 2025 में इस रामलीला को डिजिटल माध्यमों पर 82 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा। समिति ने वर्ष 2026 में डिजिटल माध्यमों से एक करोड़ से अधिक दर्शकों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है।

भव्य रामलीला महोत्सव का आयोजन आठ से 25 अक्टूबर तक श्री गुरु नानक मैदान, रेसकोर्स में किया जा रहा है। रामलीला का मंचन 11 से 21 अक्टूबर तक निर्धारित है। 20 अक्टूबर को रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन तथा 21 अक्टूबर को श्रीराम के राजतिलक का आयोजन किया जाएगा। समिति ने धर्मप्रेमी जनता से सपरिवार पहुंचकर रामलीला का आनंद लेने और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की है।

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