नवी मुंबई में पहली बार लगी ‘तेरी माया’ फिल्म हाउसफुल रही

नवी मुंबई। कोपरखैरने, नवी मुंबई के बालाजी मल्टीप्लेक्स में उत्तराखंडी फिल्म तेरी माया को दर्शकों ने खूब पसंद किया। लोकप्रिय गायक सुरेश काला व समाजसेवी शशि नेगी के प्रयास से नवी मुंबई में पहली बार लगी तेरी माया फिल्म हाउसफुल रही। इस फिल्म को नवी मुंबई में रहने वाले उत्तराखंड मूल के दर्शकों ने जबरदस्त प्रतिसाद दिया। बेहतरीन फिल्म निर्माण के लिए देवभूमि सोशल फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं कौथिग मुंबई के मुख्य संयोजक मनोज भट्ट, गढ़वाल भ्रातृ मंडल के मनोज द्विवेदी, समाजसेवी मीनाक्षी भट्ट, उत्तरांचल महासंघ की अध्यक्ष आनंदी गैरोला, आचार्य जयानन्द सेमवाल जो उत्तराखंड के हर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाते हैं। श्री सेमवाल के आशीर्वाद से ही हर कार्यक्रम का शुभारंभ होता है। उन्होंने सभी उत्तराखंड के देवी-देवताओं को श्रीफल अर्पण करके सबके उज्जवल भविष्य के लिए प्रार्थना की।
समाजसेवी विजया पन्त तुली, समाजसेवी सुलोचना कपिल, लेखिका ममता भट्ट, वरिष्ठ पत्रकार कमला बडोनी, समाजसेवी कुसुमलता गुसाईं, समाजसेवी व उत्तराखंडी बोली भाषा के संरक्षक प्रवीण ठाकुर, कौथिग फाउंडेशन के कार्यकारी अध्यक्ष सुशील कुमार जोशी, डा. राजेश्वर उनियाल, लेखक निर्देशक राकेश पुंडीर, रमेश गोदियाल, मनोज खंतवाल व अन्य सभी ने तेरी माया के निर्माता निर्देशक संजय नेगी को बधाई दी।
तेरी माया उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों, प्रेम और देवभूमि की समृद्ध परंपरा के ताने-बाने को बेहद खूबसूरती से दर्शाती है। इस फिल्म के निर्देशक व पटकथा लेखक घनसाली विधानसभा क्षेत्र के भिलंगना ब्लॉक के ग्राम दोणी के मूल निवासी संजय सिंह नेगी हैं। मुंबई के विरार में रहने वाले संजय नेगी लंबे समय से मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय रहे हैं और तेरी माया बतौर निर्माता निर्देशक उनकी पहली गढ़वाली फिल्म है। फिल्म की कहानी मुख्य रूप से राधा और गोपाल रावत नाम के दो किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बचपन के दोस्त होते हैं। गोपाल एक डॉक्टर है, जो अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद अपने छोटे बेटे के साथ वापस गांव लौटते है। गांव आने के बाद राधा और गोपाल के बच्चे के बीच एक गहरा भावनात्मक रिश्ता बन जाता है। परिवार के सहयोग और भावनात्मक जुड़ाव के जरिए गोपाल के जीवन में एक नई और सकारात्मक शुरुआत दिखाई गई है। पूरी फिल्म में पहाड़ की परंपराओं, संस्कृति और रिश्तों की गर्माहट को बखूबी पिरोया गया है। इस फिल्म में शिक्षा और रिवर्स पलायन का बहुत ही बेहतरीन सन्देश दिया गया है। वहीं घुट्टी छोड़ने का संकल्प खूबसूरत अंदाज में फिल्माया गया है। फिल्म में मार धाड़ व हिंदी फिल्मों की तरह अन्य अश्लील पक्ष नहीं हैं। यह विशुद्ध पारिवारिक फिल्म है। हर उत्तराखंडी को एक बार अवश्य तेरी माया देखनी चाहिए। यह फिल्म 6 सितंबर को वेस्टर्न मुंबई यानी भायंदर में और 13 सितंबर को खारघर, नवी मुंबई में लगेगी।

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