डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को बताया वेनेजुएला का ‘कार्यवाहक राष्ट्रपति’, मचा वैश्विक हलचल

ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का विवादित पोस्ट, वेनेजुएला को लेकर नई सनसनी

वाशिंगटन। अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला को लेकर एक विवादित सोशल मीडिया पोस्ट साझा की। पहले ही वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और सैन्य कार्रवाई के दावों से सुर्खियों में रहे ट्रंप ने अब खुद को वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति बताकर वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें उन्हें वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति दर्शाया गया है। यह तस्वीर डिजिटल रूप से संपादित बताई जा रही है, लेकिन इसके साथ किए गए दावे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी फैला दी है। पोस्ट ऐसे समय में सामने आई है, जब ट्रंप लगातार वेनेजुएला के तेल भंडार को लेकर अमेरिकी तेल कंपनियों के साथ बैठकें कर रहे हैं और वैश्विक मामलों पर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।

पोस्ट में साझा की गई तस्वीर एक संपादित विकिपीडिया पेज जैसी प्रतीत होती है, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप को जनवरी 2026 तक वेनेजुएला का मौजूदा राष्ट्रपति बताया गया है। ट्रंप इससे पहले भी यह दावा कर चुके हैं कि जब तक वेनेजुएला में सुरक्षित और व्यवस्थित सत्ता हस्तांतरण नहीं हो जाता, तब तक अमेरिका वहां की शासन व्यवस्था की निगरानी करेगा।

इसी कड़ी में ट्रंप ने हाल ही में व्हाइट हाउस में दुनिया की प्रमुख तेल और गैस कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की थी। इस बैठक में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वेनेजुएला में भविष्य का निवेश सीधे अमेरिका के माध्यम से होगा, न कि वहां की मौजूदा सरकार के साथ। ट्रंप ने अमेरिकी कंपनियों को सुरक्षा और स्थिरता का भरोसा दिलाते हुए बड़े पैमाने पर निवेश के लिए प्रोत्साहित किया।

ट्रंप का कहना है कि यदि अमेरिका ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो चीन या रूस वेनेजुएला में अपनी मजबूत पकड़ बना सकते थे। उनका तर्क है कि अमेरिकी दखल का उद्देश्य वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाना और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करना है।

जानकारों के मुताबिक अमेरिका की रणनीति वेनेजुएला के विशाल तेल संसाधनों पर प्रभाव बनाए रखने, तेल उत्पादन और बुनियादी ढांचे को पुनर्जीवित करने और वैश्विक आपूर्ति पर नियंत्रण मजबूत करने से जुड़ी हुई है। हालांकि ट्रंप का यह कदम कूटनीतिक मर्यादाओं और अंतरराष्ट्रीय कानूनों को लेकर कई सवाल भी खड़े कर रहा है।

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